📌 मामला
- बीमाकर्ता: चोलामंडलम जनरल इंश्योरेंस
- घटना: वाहन चोरी
- कानूनी मंच: जिला उपभोक्ता फोरम → राज्य आयोग → NCDRC (राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग)
- तारीख: जुलाई 2025
🧾 संक्षिप्त पृष्ठभूमि
बीमाधारक ने अपने वाहन का बीमा करवाया था। बीमाधारक ने चोरी होते ही पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी और इसकी FIR भी दर्ज कराई। उसकी बीमा कंपनी ने 107 दिन बाद जानकारी मिलने का हवाला दे कर दावे को अस्वीकार कर दिया।
शिकायतकर्ता ने जिला और राज्य आयोग से न्याय पाया, लेकिन चोलामंडलम इंश्योरेंस ने NCDRC में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।
⚖️ NCDRC का निर्णय
- प्रारंभिक प्रश्न: क्या पुलिस को तुरंत सूचना देने की स्थिति में, बीमाकर्ता को देर से सूचना मिलने का दावा ठेंगा दिखाई देता है?
- निर्णय का सार:
- बीमाधारक ने चोरी की सूचना तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को दी और FIR भी समय पर दर्ज करवाई।
- बीमा कंपनी को घटना की जानकारी देने में 107 दिन की देरी को कानूनी आधार मानने योग्य नहीं ठहराया गया।
- समर्थक फैसले:
सुप्रीम कोर्ट के केस Gurshinder Singh vs. Shriram General Insurance (2020) का सहारा लिया गया जिसमें कहा गया है कि पुलिस के संग समय पर सूचना देना ही मुख्य प्रावधान है, न कि बीमा कंपनी को तुरंत जानकारी देना। - NCDRC की राय:
- निचली और राज्य आयोग की मेधा-भरी समीक्षा को सही ठहराया गया।
- पुनरीक्षण याचिका को कोई गलती या कानूनी अनियमितता नहीं मिलने पर खारिज कर दिया गया।
💡 इसका क्या मतलब है?
- बीमा दावा खारिज करते समय बीमा कंपनियाँ अक्सर सूचना न देने का बहाना बनाती हैं।
- लेकिन अगर बीमाधारक ने पुलिस को चोरी की सूचना तुरंत दी है और FIR दर्ज करवाई है, तो बीमाकर्ता को दावा नकारने का कोई ठोस आधार नहीं है।
- घटना की जानकारी देरी से देने पर उन्हें भरपाई करनी होगी—मुकदमेबाज़ी दरम्यान ब्याज और लागत सहित।
District Forum ने ₹7,81,850 + 9% ब्याज और ₹2,200 मुकदमेबाज़ी खर्च का आदेश दिया था।
🧭 ExpertVakil की दृश्यता
अगर आपकी गाड़ी, बाइक या किसी अन्य मूल्यवान वस्तु का बीमा है और चोरी जैसी घटना घटी है:
- तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल करें
- FIR दर्ज करवाएं
- इसके बाद सुनिश्चित करें कि बीमा कंपनी को भी समय से जानकारी दें—भले ही कुछ देरी हो जाए, पुलिस सूचना पहले होनी चाहिए।
इस निर्णय से उपभोक्ताओं को बीमा दावा भविष्य में सुरक्षित रहेगा और कंपनियों को अनुचित अस्वीकरण रोकने पर मजबूर किया गया है।
🔍 यदि अब भी दावा ठुकराया जा रहा है:
- ExpertVakil.in पर अनुभवी उपभोक्ता वकील के साथ संपर्क करें
- हरियाणा या देश भर में उपभोक्ता न्यायालयों में न्याय दिलवाने में मदद करें
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