भारत में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है। करोड़ों यूज़र्स रोज़ाना मोबाइल और कंप्यूटर पर गेम खेलते हैं। लेकिन इस उद्योग से जुड़े कई गंभीर मुद्दे—जैसे लत (Addiction), जुआ-संबंधी गतिविधियाँ, नाबालिगों की भागीदारी, और वित्तीय धोखाधड़ी—सरकार के लिए चिंता का विषय बने हुए थे। इसी पृष्ठभूमि में हाल ही में केंद्र सरकार ने “Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025” पारित किया है।
यह नया क़ानून न केवल खिलाड़ियों और कंपनियों के लिए नए नियम तय करता है बल्कि ऑनलाइन गेमिंग को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा क़दम है। आइए जानते हैं विस्तार से—
1. नया कानून क्यों आया?
- ऑनलाइन गेमिंग में निवेश और खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही थी।
- कई प्लेटफ़ॉर्म जुए के नाम पर गेमिंग चला रहे थे, जिससे परिवार और समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था।
- मौजूदा आईटी नियम और राज्यों के अपने कानून पर्याप्त नहीं थे।
- केंद्र ने एक एकीकृत कानूनी ढाँचा (Unified Legal Framework) बनाने की ज़रूरत महसूस की।
2. क्या बंद किया गया है?
इस अधिनियम के तहत कुछ गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है—
- Real Money Gambling यानी सट्टेबाज़ी आधारित गेम।
- Loot Boxes और Blind Betting Games।
- बच्चों (18 वर्ष से कम) को लत लगाने वाले गेम्स।
- बिना अनुमति (Unlicensed) चल रहे विदेशी गेमिंग ऐप्स।
3. क्या बढ़ावा मिलेगा?
क़ानून का मक़सद गेमिंग को पूरी तरह रोकना नहीं बल्कि नियमन (Regulation) करना है। इसमें—
- Skill-Based Games (जैसे Chess, Rummy, Fantasy Sports आदि) को वैध मान्यता मिलेगी।
- कंपनियों को लाइसेंसिंग सिस्टम के तहत काम करना होगा।
- Consumer Protection के लिए Complaint Mechanism बनेगा।
- Responsible Gaming Tools (जैसे समय सीमा, खर्च की सीमा) लागू करना अनिवार्य होगा।
4. कंपनियों और स्टार्टअप्स पर असर
- वैध कंपनियों को अब अधिक कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
- विदेशी निवेशकों के लिए भारत एक सुरक्षित और आकर्षक मार्केट बन सकता है।
- ग़ैर-क़ानूनी और जुआ-आधारित कंपनियों पर भारी जुर्माना और कठोर दंड लागू होंगे।
5. खिलाड़ियों पर असर
- सुरक्षित और भरोसेमंद गेमिंग का अनुभव मिलेगा।
- बच्चों और किशोरों के लिए सख़्त आयु सीमा (Age Verification) लागू होगी।
- खिलाड़ियों के पैसे और डेटा की सुरक्षा बढ़ेगी।
6. कानूनी विशेषज्ञ की राय (Expert Vakil View)
यह अधिनियम संतुलन बनाने की कोशिश करता है—
- एक ओर यह जुए और धोखाधड़ी को रोकता है,
- दूसरी ओर यह रोज़गार, स्टार्टअप और डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा देता है।
भविष्य में यह क़ानून अदालतों और राज्य सरकारों के सहयोग से और भी स्पष्ट होगा।
✍️ निष्कर्ष
“Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025” भारत में ऑनलाइन गेमिंग को नया आकार देगा। अब सवाल यह है कि कंपनियाँ और खिलाड़ी इन नियमों को कितनी गंभीरता से अपनाते हैं। सही ढंग से लागू होने पर यह कानून भारत को दुनिया का सबसे सुरक्षित और तेज़ी से बढ़ता हुआ ऑनलाइन गेमिंग हब बना सकता है।


