धारा 60(5)(c) आईबीसी: एनसीएलटी की सीमित भूमिका
कॉर्पोरेट दिवालिया कार्यवाही में ट्रेडमार्क जैसे बौद्धिक संपदा के मालिकाना हक पर विवाद उठना आम है। हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने स्पष्ट किया कि धारा 60(5)(c) आईबीसी के तहत एनसीएलटी केवल उन मुद्दों पर फैसला कर सकता है जो दिवालिया प्रक्रिया से सीधे जुड़े हों। अगर [S. 60(5)(c) IBC] ट्रेडमार्क विवाद दिवालियापन से असंबंधित है, तो एनसीएलटी का क्षेत्राधिकार नहीं बनता। यह फैसला आपके [S. 60(5)(c) IBC हिंदी में] अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
मामला: ग्लोस्टर लिमिटेड बनाम ग्लोस्टर केबल्स
फोर्ट ग्लोस्टर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) में “ग्लोस्टर” ट्रेडमार्क का विवाद उठा। ग्लोस्टर लिमिटेड सफल रिजॉल्यूशन एप्लीकेंट था, जबकि ग्लोस्टर केबल्स लिमिटेड ने मालिकाना हक का दावा किया। एनसीएलटी ने ट्रेडमार्क को कॉर्पोरेट डेब्टर का एसेट माना और ग्लोस्टर लिमिटेड को टाइटल दिया।
एनसीएलएटी ने एनसीएलटी के फैसले को उलट दिया, कहा कि ट्रेडमार्क टाइटल पर फैसला एनसीएलटी का क्षेत्राधिकार से बाहर है। दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को फैसला सुनाया (2026 INSC 81)।
- ट्रेडमार्क असाइनमेंट पहले से मौजूद था, जो रिजॉल्यूशन प्लान से स्वतंत्र था।
- रिजॉल्यूशन प्लान में ट्रेडमार्क टाइटल स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया।
- विवाद दिवालिया से उत्पन्न नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती था।
धारा 60(5)(c) आईबीसी का विश्लेषण
धारा 60(5)(c) आईबीसी कहती है: एनसीएलटी को “किसी भी कानून या तथ्य के प्रश्न पर क्षेत्राधिकार है, जो इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन या लिक्विडेशन कार्यवाही से उत्पन्न हो या संबंधित हो।” यह रेजिडुअल पावर है, लेकिन असीमित नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि नेक्सस दिवालिया से होना जरूरी है।
जटिल शब्द सरल में:
- रेजिडुअल जुरिस्डिक्शन: बचा हुआ अधिकार, जो केवल आईबीसी मामलों तक सीमित।
- नेक्सस: सीधा संबंध; अगर विवाद दिवालिया के बिना भी मौजूद हो, तो बाहर।
कोर्ट ने पूर्व फैसलों का हवाला दिया:
| केस लॉ | मुख्य तर्क | प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| Embassy Property v. State of Karnataka | एनसीएलटी केवल दिवालिया से जुड़े मुद्दे तय करे। | व्यापक जुरिस्डिक्शन की सीमा। |
| Gujarat Urja v. Amit Gupta | विवाद दिवालिया उत्पन्न हो। | नेक्सस टेस्ट। |
[S. 60(5)(c) IBC कानूनी सलाह] में यह स्पष्ट है कि ट्रेडमार्क कोर्ट या आईपी बोर्ड का क्षेत्र है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और तर्क
सुप्रीम कोर्ट ने कहा: एनसीएलटी ने ट्रेडमार्क टाइटल घोषित कर क्षेत्राधिकार लांघा। रिजॉल्यूशन प्लान में टाइटल विवादित था, इसलिए प्लान अप्रूवल से अतिरिक्त अधिकार नहीं मिल सकता।
मुख्य बिंदु:
- धारा 60(5)(c) आईबीसी ब्लैंकेट पावर नहीं देती।
- विवाद “dehors” (बाहर) दिवालिया था, इसलिए सिविल कोर्ट जाएं।
- एनसीएलटी/एनसीएलएटी दोनों के फैसले सेट अस्याइड।
2026 अपडेट: कोई संशोधन नहीं, लेकिन यह फैसला आईबीसी जुरिस्डिक्शन को मजबूत करता है। BNS/BNSS/BSA (नए आपराधिक कानून) आईबीसी से असंबंधित, लेकिन फ्रॉड जैसे मामलों में क्रॉस-रेफरेंस संभव।
आपके अधिकारों की रक्षा कैसे करें
[S. 60(5)(c) IBC 2026 अपडेट] में सलाह:
- ट्रेडमार्क विवाद हो तो सीधे आईपी कोर्ट जाएं, एनसीएलटी न लें।
- रिजॉल्यूशन एप्लीकेंट के रूप में प्लान में स्पष्ट टाइटल क्लॉज डालें।
- विवादास्पद एसेट्स पर पूर्व जाँच कराएं। www.expertvakil.com पर [S. 60(5)(c) IBC हिंदी में] कंसल्ट करें।
चरणबद्ध तरीका:
- विवाद की नेक्सस जाँचें: दिवालिया से जुड़ा?
- सुप्रीम कोर्ट प्रेसिडेंट्स पढ़ें।
- विशेषज्ञ वकील से सलाह लें: Info@expertvakil.com।
निष्कर्ष
यह फैसला [S. 60(5)(c) IBC] के दायरे को साफ करता है, जिससे दिवालिया प्रक्रिया तेज होगी। आपके व्यापारिक अधिकार सुरक्षित रहें, नेक्सस टेस्ट अपनाएं। सोचें: आपका अगला आईपी विवाद कहाँ लड़ेंगे? शेयर करें, कमेंट करें। अधिक सहायता के लिए www.expertvakil.com, ईमेल Info@expertvakil.com, व्हाट्सएप +91-8980028995।


