पत्नी को भरण-पोषण कब नहीं मिलेगा?

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भारतीय कानून में पत्नी को भरण-पोषण या गुजारा भत्ता का अधिकार सीआरपीसी की धारा 125 के तहत दिया गया है, जो गरीबी और भुखमरी रोकने के लिए है। लेकिन धारा 125(4) कुछ स्पष्ट अपवाद बताती है, जहां पत्नी इस हक से वंचित हो जाती है। ये अपवाद व्यभिचार, पर्याप्त कारण रहित अलगाव और आपसी सहमति पर अलग रहना जैसे मामलों पर आधारित हैं।

20 साल से अधिक अनुभव वाले कानूनी पत्रकार के रूप में, मैंने हजारों फैसलों का विश्लेषण किया है। यह ब्लॉग CrPC 125, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24-25 और प्रमुख अदालती फैसलों पर आधारित है, जो पारदर्शिता लाता है।

भरण-पोषण का कानूनी आधार समझें

सीआरपीसी धारा 125 कहती है कि अगर पति पर्याप्त साधन वाला है लेकिन भरण-पोषण न दे या इनकार करे, तो पत्नी अदालत से राशि मांग सकती है। लेकिन “अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ” होना जरूरी है। धारा 125(4) स्पष्ट करती है: व्यभिचार में रहने वाली, बिना पर्याप्त कारण पति से अलग रहने वाली या आपसी सहमति से अलग रहने वाली पत्नी को भरण-पोषण नहीं मिलेगा।

हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) की धारा 24 में अंतरिम भरण-पोषण और धारा 25 में स्थायी गुजारा भत्ता है, लेकिन पत्नी की कमाई या दोषपूर्ण आचरण पर विचार होता है। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा कि भरण-पोषण दंड नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा है।

Illustration of Indian court gavel with CrPC 125 document denying wife maintenance on grounds like adultery and earning wife.

प्रमुख आधार: पत्नी को भरण-पोषण न मिलने के

यहां 8 मुख्य आधार दिए गए हैं, अदालती फैसलों के साथ:

आधारविवरणप्रमुख केस
व्यभिचार में रहनापत्नी दूसरे पुरुष के साथ अवैध संबंध में हो तो धारा 125(4) लागू। तलाकशुदा पत्नी पर भी।छत्तीसगढ़ एचसी: तलाकशुदा पत्नी का अवैध संबंध साबित होने पर इनकार। 
पर्याप्त कारण रहित अलगावस्वेच्छा से घर छोड़ना, क्रूरता साबित न हो तो नहीं मिलेगा।इलाहाबाद एचसी: पत्नी ने अमीर-गरीब अंतर पर घर छोड़ा, इनकार। 
आपसी सहमति से अलगावसमझौते में भरण-पोषण न लेने का प्रावधान हो तो।रोहताश सिंह बनाम रमेंद्री: तलाक के बाद विचार। 
कमाने योग्य पत्नीशिक्षित/प्रोफेशनली क्वालिफाइड पत्नी खुद कमाई कर सकती हो।दिल्ली सेशन कोर्ट: नौकरी ढूंढने का आदेश, 1 साल तक ही भरण-पोषण। ​; डॉ. ई. शांति बनाम डॉ. एच.के. वासुदेव।
दूसरी शादीदूसरा विवाह करने पर पूरा हक समाप्त।धारा 125(4): स्पष्ट बार। 
कंजुगल राइट्स डिक्रीपत्नी के खिलाफ वैवाहिक अधिकार बहाली का डिक्री बिना चुनौती दिए।कुछ कोर्ट विभाजित, लेकिन पत्नी का आचरण देखा जाता। 
पत्नी के दोष पर तलाकक्रूरता/परित्याग पर तलाक तो न्यूनतम या इनकार।HMA धारा 25: आचरण महत्वपूर्ण। 
झूठे दस्तावेज/गोपनआधार कार्ड बदलकर छिपाना आदि।इलाहाबाद एचसी: दस्तावेज गोपन पर खारिज। 

ये आधार क्रॉस-एग्जामिनेशन और सबूतों पर निर्भर। पत्नी को “पर्याप्त कारण” साबित करना पड़ता।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले

सुप्रीम कोर्ट ने चतुर्भुज बनाम सीता बाई (2007) में कहा: “अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ” का मतलब भिखारी होना नहीं, लेकिन पत्नी की कमाई पर विचार। अगर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं और अंतर कम हो, तो इनकार संभव।

इलाहाबाद एचसी (2026): पत्नी कमाती हो तो भी अगर आय अंतर अधिक, मिल सकता है, लेकिन मात्र नौकरी आधार नहीं। पद्मजा शर्मा बनाम रतन लाल शर्मा: दोनों कमाने वाले माता-पिता बच्चे के भरण में योगदान दें।​

छत्तीसगढ़ एचसी (2025): अवैध संबंध साबित तो तलाकशुदा पत्नी वंचित। दिल्ली एचसी: बराबर कमाने वाले पति-पत्नी को अंतरिम भरण नहीं।

Illustration of Indian court gavel with CrPC 125 document denying wife maintenance on grounds like adultery and earning wife.

व्यावहारिक सलाह: पति-पत्नी दोनों के लिए

पतियों के लिए: मजबूत सबूत इकट्ठा करें जैसे वॉट्सएप चैट, गवाह, आय प्रमाण। क्रॉस-एग्जामिनेशन में पत्नी के कारण पूछें। लेकिन झूठे आरोप न लगाएं, अन्यथा उल्टा नुकसान।

पत्नियों के लिए: क्रूरता/परित्याग के ठोस प्रमाण रखें। कमाई हो तो पारदर्शी आय विवरण दें। दूसरा संबंध न रखें।

अगर विवाद हो, तो फैमिली कोर्ट या मीडिएशन से सुलझाएं। अहमदाबाद जैसे शहरों में लीगल एड उपलब्ध।

निष्कर्ष: न्याय सुनिश्चित करने के उपाय

भरण-पोषण सामाजिक न्याय है, लेकिन दुरुपयोग रोकना जरूरी। अदालतें अब सख्त हैं- सबूत और ईमानदारी महत्वपूर्ण। हालिया फैसले (2025-2026) दिखाते हैं कि कमाने वाली या दोषी पत्नी वंचित। कानूनी सलाह लें, पारदर्शिता रखें। यह ब्लॉग न्यायिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए है।​

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