कल्पना कीजिए। आप कोर्ट में हैं। अपना बचाव कर रहे हैं। आरोप लगाते हैं। अचानक विपक्ष मानहानि का केस ठोक दे। डर लगेगा न? दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- नहीं! दलीलों में कही बातें मानहानि नहीं।
यह फैसला Harkirat Singh Sodhi v. State of NCT of Delhi में आया। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने सुनाया। पारिवारिक संपत्ति विवाद था। सरदारनी सुरिंदर कौर सोढ़ी की मौत 2013 में हुई। वसीयतें टकराईं।
हरकीरत ने बहनोई रविंदर पर जालसाजी का आरोप लगाया। रविंदर ने मानहानि की शिकायत की। कोर्ट ने खारिज कर दी। क्यों? क्योंकि कोर्ट में दलीलें सुरक्षित हैं।
केस की पूरी कहानी: परिवार का टूटा बंधन
सुरिंदर कौर की मौत ने परिवार बांट दिया। दो वसीयतें। सिविल सूट चले। हरकीरत ने पुलिस शिकायत की। जालसाजी का इल्जाम लगाया। रविंदर भड़क गए।
उन्होंने IPC 499-500 के तहत केस किया। मजिस्ट्रेट ने समन जारी किया। हरकीरत हाईकोर्ट गए। जस्टिस ने कहा- दलीलें बचाव का हक हैं। झूठी तो झूठी गवाही का केस करो। मानहानि नहीं।
इसलिए, मुकदमेबाज़ डरें नहीं। अपना पक्ष रखें। कोर्ट ने साफ कहा। हर गलत बात पर मानहानि केस चलेगा तो न्याय कैसे होगा?
कानूनी आधार: आईपीसी धारा 499 के अपवाद
IPC 499 मानहानि परिभाषित करता है। लेकिन अपवाद हैं। नौ अपवाद। कोर्ट कार्यवाही में कही बातें अपवाद 9 में आतीं। “सार्वजनिक हित” या “अच्छे विश्वास” से।
दिल्ली हाईकोर्ट ने absolute privilege की बात की। जज, वकील, गवाह सुरक्षित। पक्षकार भी। उद्देश्य? न्याय प्रक्रिया बचाना। बिना डर के बोलना।
उदाहरण लीजिए। पुराना केस। जज ने कहा। दलीलें बदनामी का हथियार नहीं। वे केस साबित करने के लिए होतीं। हार गए तो क्या? मानहानि नहीं।
जस्टिस के शब्द: कोर्ट का साफ संदेश
कोर्ट बोला। “न्यायिक कार्यवाही में आरोप पक्ष का केस साबित करने को होते हैं।” वह सच्चा मानता है। हार भी जाए तो बदनामी का इरादा नहीं।
इसके अलावा, “हर बात पर मानहानि देखोगे तो पक्ष डरेगा।” कोर्ट जाने का हक मरेगा। इसलिए, बचाव का अधिकार मजबूत।
फिर, प्लीडिंग्स पब्लिक नहीं फैलाईं। सिर्फ कोर्ट रिकॉर्ड। समाज की नजर में बदनामी नहीं। कोई सबूत नहीं।
व्यापक प्रभाव: अदालतों पर असर
यह फैसला बड़ा है। भारत में मानहानि केस बढ़े। 2024 में 14,500 केस। 67% ऑनलाइन। लेकिन कोर्ट में? अब सुरक्षित।
परिणामस्वरूप, वकील खुलकर बोलेंगे। पक्षकार डरेंगे नहीं। न्याय तेज होगा। हालांकि, झूठी गवाही पर सजा रहेगी। IPC 193।
Expert Vakil जैसे प्लेटफॉर्म कहते हैं। यह आम आदमी को ताकत देता है। संपत्ति विवादों में आम। परिवार टूटते हैं। अब केस लड़ो बेखौफ।
वास्तविक जीवन उदाहरण: आपकी कहानी
सोचिए। भाई-भाई लड़ रहे। जमीन पर। एक आरोप लगाता है। दूसरा मानहानि करता। अब दिल्ली HC कहता- रुको! दलीलें वैध।
एक और केस। 2024 में। वकील ने जज पर आरोप लगाया प्लीडिंग में। कोर्ट ने क्वाश किया। absolute privilege।
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मानहानि कानून का इतिहास: भारत में बदलाव
भारत में मानहानि ब्रिटिश काल से। IPC 1860। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा। अभिव्यक्ति की आजादी। आर्टिकल 19(1)(a)।
हालांकि, 2015 में Subrata Roy केस। सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइंस दीं। अब BNS आया। लेकिन IPC अभी लागू कुछ जगह।
इस फैसले ने मजबूत किया। कोर्ट प्रिविलेज। वकीलों के लिए राहत। क्लाइंट्स खुश।
विशेषज्ञ विश्लेषण: Expert Vakil की नजर
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लेकिन सावधानी। पब्लिक में बदनामी करो तो केस बनेगा। कोर्ट के बाहर। सोशल मीडिया पर। 67% केस वही।
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