दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में ब्रिजस्टोन को मिला 34.41 लाख रुपये का मुआवजा

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दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रेडमार्क उल्लंघन के एक अहम मामले में जापानी कंपनी ब्रिजस्टोन कॉर्पोरेशन के पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा जारी की है। यह फैसला उस कंपनी के खिलाफ दिया गया है जो ऑटोमोबाइल टायर और ट्यूब के उत्पादन में ‘BRIMESTONE’ नाम का उपयोग कर रही थी, जो कि ‘BRIDGESTONE’ के ट्रेडमार्क से अत्यंत मिलता-जुलता था।

अदालत का निर्णय और मुआवजा

न्यायमूर्ति अमित बंसल की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने प्रतिवादी कंपनी एम/एस मर्लिन रबर को 34.41 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। न्यायालय ने पाया कि प्रतिवादी ने नकली उत्पादों की बिक्री से अवैध रूप से आर्थिक लाभ कमाया था।

ब्रिजस्टोन कॉर्पोरेशन की विश्वसनीयता

ब्रिजस्टोन कॉर्पोरेशन ने अदालत को सूचित किया कि कंपनी की स्थापना 1931 में हुई थी। यह कंपनी टायर और ट्यूब, प्राकृतिक व सिंथेटिक रबर, सार्वजनिक निर्माण सामग्री और समुद्री संरचनाओं के लिए उत्पादों का उत्पादन व बिक्री करती है।

ब्रिजस्टोन के अनुसार, उनके उत्पाद 150 से अधिक देशों में बेचे जाते हैं और वे टायर व रबर उत्पादों के विश्व के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक हैं। कंपनी का ट्रेडमार्क ‘BRIDGESTONE’ भारत सहित 130 से अधिक देशों में पंजीकृत है और इसे भारत, जापान, थाईलैंड, ताइवान, हांगकांग व फिलीपींस जैसे कई देशों में एक प्रसिद्ध ट्रेडमार्क के रूप में मान्यता प्राप्त है।

ट्रेडमार्क उल्लंघन की शिकायत

अप्रैल 2022 में ब्रिजस्टोन को पता चला कि प्रतिवादी कंपनी ‘BRIMESTONE’ नाम से दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए ब्यूटाइल ट्यूब बेच रही थी। यह कंपनी ऑनलाइन ट्रेड डायरेक्टरी में भी इसी नाम से लिस्टेड थी।

ब्रिजस्टोन ने तर्क दिया कि ‘BRIMESTONE’ नाम उसके ट्रेडमार्क ‘BRIDGESTONE’ से अत्यंत मिलता-जुलता है, जिससे ग्राहक भ्रमित हो सकते हैं। कंपनी ने अदालत से स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की।

अदालत की कार्यवाही

28 अप्रैल 2023 को अदालत ने एकतरफा अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की, जिसमें प्रतिवादी को ‘BRIMESTONE’ या इसी प्रकार के अन्य नामों का उपयोग कर उत्पाद बनाने, बेचने या विज्ञापन करने से रोका गया।

अदालत ने दोनों ट्रेडमार्क की तुलना के बाद निष्कर्ष निकाला कि संरचनात्मक, दृश्य और ध्वनि के आधार पर दोनों नामों में अत्यंत समानता है। न्यायालय ने इसे ट्रेडमार्क उल्लंघन और पासिंग ऑफ का स्पष्ट मामला माना, क्योंकि प्रतिवादी ने ब्रिजस्टोन की प्रतिष्ठा का अनुचित लाभ उठाया था।

मुआवजा और हर्जाना

मुआवजे के संदर्भ में, अदालत ने स्थानीय आयुक्त की रिपोर्ट की समीक्षा की और पाया कि प्रतिवादी के परिसर में बड़ी मात्रा में नकली उत्पाद पाए गए। न्यायालय ने कहा कि प्रतिवादी ने तीन वर्षों तक ‘BRIMESTONE’ नाम के तहत नकली उत्पाद बेचकर आर्थिक लाभ कमाया।

अदालत ने कहा, “प्रतिवादी ने ब्रिजस्टोन के पंजीकृत ट्रेडमार्क से मिलते-जुलते नकली उत्पादों को बेचकर महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ अर्जित किया है। मेरी राय में, यह एक गंभीर उल्लंघन है, जिसके लिए मुआवजे का भुगतान आवश्यक है।”

Case title: Bridgestone Corporation vs. M/S Merlin Rubber (CS(COMM) 254/2023)

निष्कर्ष

दिल्ली हाईकोर्ट ने ब्रिजस्टोन को मुकदमे की वास्तविक लागत और 34.41 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने ब्रिजस्टोन को कर निर्धारण अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर मुकदमे की वास्तविक लागत निर्धारित करने के निर्देश भी दिए।

यह फैसला न केवल ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामलों में एक नजीर बनेगा बल्कि यह भी साबित करता है कि न्यायालय बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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