Netflix सब्सक्रिप्शन विवाद में उपभोक्ता को मिला इंसाफ: LG और Juneja’s Circuit Mall को देना होगा मुआवजा

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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-द्वितीय, यूटी चंडीगढ़ ने एक अहम निर्णय में ‘एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड’ और ‘जुनेजा सर्किट मॉल’ को सेवा में कमी के लिए उत्तरदायी ठहराया है। यह मामला दिवाली फेस्टिवल ऑफर के तहत तीन महीने की मुफ्त नेटफ्लिक्स सदस्यता प्रदान करने में विफलता से जुड़ा था।

पूरा मामला:

रमन सिक्का (शिकायतकर्ता) ने दिवाली ऑफर के दौरान 54,500 रुपये में जुनेजा के सर्किट मॉल से एलजी एलईडी टीवी खरीदा था। इस ऑफर में तीन महीने का नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन शामिल था। हालांकि, टीवी खरीदने के बाद शिकायतकर्ता को वादा किया गया सब्सक्रिप्शन नहीं मिला। जुनेजा के सर्किट मॉल ने आश्वासन दिया था कि कोड एक महीने के भीतर ईमेल पर भेजा जाएगा, लेकिन बार-बार फॉलो-अप के बावजूद यह नहीं हुआ।

शिकायतकर्ता ने एलजी कस्टमर केयर से भी संपर्क किया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अंततः उपभोक्ता ने एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, जुनेजा के सर्किट मॉल और एलजी कस्टमर केयर के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज की।

प्रतिवादियों का पक्ष:

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, जुनेजा के सर्किट मॉल और एलजी कस्टमर केयर ने दावा किया कि एक अनजानी त्रुटि के कारण शिकायतकर्ता का नाम पात्र खरीदारों की सूची से छूट गया था। उन्होंने कहा कि यह गलती जानबूझकर नहीं की गई थी और सुधार के रूप में तीन महीने की बजाय एक वर्ष की मुफ्त नेटफ्लिक्स सदस्यता की पेशकश की गई थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि टीवी में कोई खराबी नहीं थी, इसलिए खरीद मूल्य की पूर्ण वापसी का सवाल ही नहीं उठता।

जिला आयोग का निर्णय:

जिला आयोग ने अपने अवलोकन में पाया कि एलजी और जुनेजा के सर्किट मॉल ने अपनी प्रचार योजना के तहत तीन महीने की मुफ्त नेटफ्लिक्स सदस्यता का वादा किया था, जिसे पूरा नहीं किया गया। आयोग ने कहा कि यह सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का स्पष्ट मामला है।

आयोग ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता ने अपने परिवार की खुशी के लिए अपनी मेहनत की कमाई से टीवी खरीदा था, और वादे को पूरा न करने से उन्हें मानसिक पीड़ा और असुविधा का सामना करना पड़ा।

आयोग का आदेश:

इस मामले में, जिला आयोग ने एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स और जुनेजा के सर्किट मॉल को 4,000 रुपये मानसिक पीड़ा के लिए और 5,000 रुपये मुकदमेबाजी लागत के रूप में शिकायतकर्ता को भुगतान करने का निर्देश दिया।

निष्कर्ष:

यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करने और अनुचित व्यावसायिक व्यवहार पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनियों को अपने प्रचार वादों का सम्मान करना होगा अन्यथा वे सेवा में कमी के लिए उत्तरदायी होंगे।

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