भारत में पिछले कुछ वर्षों में Live-in Relationship का चलन तेजी से बढ़ा है। कई मामलों में लड़का और लड़की लंबे समय तक साथ रहते हैं, लेकिन बाद में एक पक्ष शादी करने से मना कर देता है। ऐसे मामलों में अक्सर सवाल उठता है — क्या Live-in के बाद शादी से इनकार करना अपराध है? और पीड़ित व्यक्ति के पास क्या कानूनी उपाय हैं?
एक अनुभवी अधिवक्ता के रूप में, आइए इसे सरल भाषा में समझते हैं।
1. क्या Live-in Relationship भारत में कानूनी है?
भारत में Live-in Relationship को पूरी तरह अवैध नहीं माना गया है। कई मामलों में अदालतों ने कहा है कि दो बालिग व्यक्तियों का आपसी सहमति से साथ रहना अपराध नहीं है।
लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब:
- एक व्यक्ति शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाता है
- लंबे समय तक साथ रहने के बाद अचानक शादी से इनकार कर देता है
ऐसी स्थिति में कानून हस्तक्षेप कर सकता है।
2. शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाना
यदि कोई पुरुष किसी महिला से शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाता है, और बाद में शुरू से ही उसकी मंशा शादी करने की नहीं थी, तो यह गंभीर अपराध हो सकता है।
ऐसे मामलों में निम्न धाराएँ लागू हो सकती हैं:
- IPC धारा 376 (बलात्कार) – यदि यह साबित हो जाए कि सहमति केवल शादी के झूठे वादे के कारण दी गई थी।
- IPC धारा 417 / 420 (धोखाधड़ी) – यदि धोखा देकर संबंध बनाया गया।
अदालत यह देखती है कि:
- क्या शुरुआत से ही शादी का इरादा नहीं था?
- क्या केवल शारीरिक संबंध के लिए झूठ बोला गया?
अगर यह साबित हो जाता है तो आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।

3. कब नहीं बनता अपराध?
हर Live-in Relationship के टूटने पर अपराध नहीं बनता।
यदि:
- दोनों बालिग थे
- दोनों की सहमति से संबंध बने
- सच में शादी का इरादा था लेकिन बाद में किसी कारण से रिश्ता टूट गया
तो ऐसे मामलों में अदालत इसे आपसी संबंध का विवाद मान सकती है।
4. Live-in में रहने वाली महिला के अधिकार
यदि महिला लंबे समय तक Live-in में रही है, तो उसे कुछ कानूनी अधिकार मिल सकते हैं:
1️⃣ भरण-पोषण (Maintenance)
कुछ परिस्थितियों में महिला भरण-पोषण की मांग कर सकती है।
2️⃣ घरेलू हिंसा कानून का संरक्षण
Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 के तहत Live-in Relationship को भी कई मामलों में मान्यता दी गई है।
3️⃣ बच्चे के अधिकार
Live-in Relationship से जन्मे बच्चे को कानूनी अधिकार और वैधता मिलती है।
5. अदालत किन बातों पर फैसला करती है?
न्यायालय निम्न बातों को देखता है:
- Live-in का समय कितना लंबा था
- क्या दोनों पति-पत्नी की तरह रहते थे
- क्या शादी का स्पष्ट वादा किया गया था
- क्या महिला को धोखा दिया गया
इन तथ्यों के आधार पर ही अदालत तय करती है कि मामला धोखाधड़ी, बलात्कार या सामान्य संबंध विवाद है।
निष्कर्ष
Live-in Relationship अपने आप में अपराध नहीं है, लेकिन शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाना और बाद में मुकर जाना कानूनन गंभीर मामला बन सकता है। हर केस की परिस्थितियाँ अलग होती हैं, इसलिए कानूनी सलाह लेना बहुत जरूरी है।
For more information…
Find a Lawyer : https://www.expertvakil.com/
Tax & Compliance : https://expertvakil.in/
Legal Draft : https://theexpertvakil.in/
BLOG : https://blog.expertvakil.com/
📞 Mobile : +91-8980028995
📧 Email : info@expertvakil.com



















