खराब फोन न बदलने पर उपभोक्ता आयोग ने दी सख्त सज़ा
आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हर किसी की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। ऐसे में जब कोई मोबाइल खराब निकलता है और कंपनी या उसके सर्विस सेंटर शिकायतकर्ता की समस्या का समाधान करने में विफल रहते हैं, तो उपभोक्ता के लिए यह समय बेहद कठिन होता है। हाल ही में दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सैमसंग इंडिया और उसके अधिकृत सर्विस सेंटर को दोषी ठहराते हुए उपभोक्ता के हक में एक ठोस फैसला दिया है, जो अन्य उपभोक्ताओं के लिए मिसाल बन सकता है। यह ब्लॉग “The Expert Vakil” द्वारा आपके सामने इस महत्वपूर्ण विषय की पूरी जानकारी प्रस्तुत करता है।
मामला क्या था?
शिकायतकर्ता ने 22 मार्च 2024 को सैमसंग A35 (SM–A356E/DS) मोबाइल ₹30,999/- में खरीदा था। खरीद के तीसरे दिन ही मोबाइल की LCD डिस्प्ले पर एक लाइन आना शुरू हो गई। शिकायतकर्ता ने विक्रेता से संपर्क किया और सेवा केंद्र जाने की सलाह मिली। सेवा केंद्र ने मोबाइल को अस्थायी रूप से ठीक किया, लेकिन समस्या बनी रही। बाद में मोबाइल को फिर से निरीक्षण हेतु भेजा गया और बताया गया कि मोबाइल में निर्माण दोष है।
सर्विस सेंटर और सैमसंग इंडिया की बड़ी गलती
मोबाइल के साथ बॉक्स, पिन, IMEI स्टिकर आदि जमा करने को कहा गया और बहाने बनाकर ग्राहक को मोबाइल बदलने से मना किया गया। ग्राहक ने कई बार संपर्क और शिकायत के बाद भी ठीक तरीके से सेवा नहीं पाई। अंततः ग्राहक को मजबूरन दूसरी फोन खरीदनी पड़ी। यह सारी प्रक्रिया उपभोक्ता को मानसिक कष्ट और आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाली साबित हुई।
अदालत ने क्या फैसला दिया?
दिल्ली जिला आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता ने उचित समय में शिकायत दर्ज की थी और सेवा केंद्र द्वारा IMEI स्टिकर की मांग अनुचित थी क्योंकि वारंटी नीति में इसका कहीं उल्लेख नहीं था। सैमसंग इंडिया और उसके सेवा केंद्र को अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी का दोषी पाया गया। आयोग ने ग्राहक को ₹30,999/- वापस करने और ₹25,000/- मानसिक कष्ट का मुआवजा देने का आदेश दिया।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत अधिकार
2019 के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं को चेतावनी दी गई है कि किसी भी उत्पाद में निर्माण दोष पाए जाने पर वे निर्माता या विक्रेता से उचित मुआवजा और सेवा पाने के लिए कानूनी उपाय कर सकते हैं। यह मामला यह भी दिखाता है कि कंपनियों को उपभोक्ताओं की शिकायतों का ध्यानपूर्वक और समयबद्ध तरीके से समाधान करना आवश्य है।
“Expert Vakil” का सुझाव: उपभोक्ता सुरक्षा के लिए कदम
- अपने अधिकारों को समझें: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत उपभोक्ताओं के पास मुआवजा हासिल करने के अधिकार हैं।
- सबूत संभाल कर रखें: खरीदारी बिल, वारंटी कार्ड, सेवा केंद्र की रिपोर्ट, तथा संवादों का रिकॉर्ड रखना जरूरी है।
- उपभोक्ता आयोग से शिकायत करें: अगर सेवा केंद्र शिकायतों को अनदेखा करता है, तो उपभोक्ता आयोग में जाकर केस दर्ज कराएं।
- नि:शुल्क कानूनी सलाह लें: बेहतर होगा कि इस दौरान “Expert Vakil” जैसे अनुभवी वकीलों से कानूनी सहायता लें।
केस से जुड़ी कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं
- कई बार सेवा केंद्र वारंटी के बावजूद अतिरिक्त शुल्क वसूल लेते हैं, जो कानूनी रूप से गलत है।
- सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों के खिलाफ ऐसे कई मामले आ चुके हैं जहां उनकी सेवा गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।
- सेल फोन, फ्रिज, टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट से उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ रही हैं।
- न्यायालयों ने बार-बार कंपनियों को दोषी पाते हुए उपभोक्ताओं को मुआवजा दिलाया है जिससे यह संदेश गया है कि ग्राहक हमेशा हकदार होते हैं।




















