डिजिटल अरेस्ट एक नया साइबर अपराध (Cyber Crime) है, जिसमें ठग सरकारी एजेंसी (जैसे CBI, NIA, Cyber Cell, ED) के अधिकारी बनकर फोन या वीडियो कॉल के ज़रिए लोगों को धमकाते हैं कि उन्होंने कोई गंभीर अपराध किया है और अब उन्हें “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” किया जा रहा है।
👉 असल में यह 100% फर्जी और गैरकानूनी ठगी का तरीका है।
🧠 कैसे काम करता है डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड?
- एक कॉल आता है (अक्सर विदेशी नंबर से)
- कॉलर खुद को पुलिस, CBI, Cyber Crime या अन्य एजेंसी का अधिकारी बताता है।
- झूठे आरोप लगाता है
- कहता है कि आपका नाम किसी ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग, या सेक्स रैकेट केस में आ गया है।
- वीडियो कॉल पर लाता है (Skype/Zoom/WhatsApp)
- एक नकली “ऑफिस रूम” दिखाया जाता है।
- आपके स्क्रीनशॉट, आधार, फोटो लिए जाते हैं।
- गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे मांगता है
- कहता है कि “डिजिटल अरेस्ट” से बचना है तो तुरंत जुर्माना/बेल की राशि भेजो।
- कई लोग डर के कारण UPI/NEFT से पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।
🚨 यह पूरी प्रक्रिया फर्जी है!
❌ भारत में कोई भी कानूनी गिरफ्तारी फोन या वीडियो कॉल पर नहीं होती।
❌ पुलिस/एजेंसी पहले लिखित नोटिस (CrPC 41A) भेजती है।
❌ डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।
⚖️ कानूनी धाराएँ जो इसे अपराध बनाती हैं:
| अपराध | संबंधित कानून |
|---|---|
| धोखाधड़ी | IPC की धारा 420 |
| पहचान की चोरी | IT Act की धारा 66C |
| डराकर धन उगाही | IPC की धारा 384 |
| जाली दस्तावेज बनाना | IPC की धारा 465 |
🛡️ डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें?
- किसी भी अनजान कॉल/वीडियो कॉल का भरोसा न करें।
- अगर कॉलर सरकारी अफसर होने का दावा करे – तो कहें कि आप ऑफिस आकर मिलेंगे।
- कभी भी फोन पर पैसे न भेजें।
- तुरंत 1930 पर साइबर क्राइम की रिपोर्ट करें।
- www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
- ExpertVakil.in जैसे विश्वसनीय लीगल पोर्टल से कानूनी सलाह लें।
🧾 निष्कर्ष:
“Digital Arrest” एक साइबर ठगी का नया रूप है, जो डर और भ्रम का फायदा उठाकर लोगों से लाखों रुपए लूट लेता है। इसके झांसे में ना आएं। कानूनी गिरफ्तारी की प्रक्रिया केवल फिजिकल और दस्तावेज-आधारित होती है, न कि वीडियो कॉल पर।



















