क्या आप जानते हैं: लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट और रेंट एग्रीमेंट में क्या अंतर है?

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किसी संपत्ति को किराए पर लेने या उपयोग करने के लिए दो प्रमुख समझौतों का उपयोग किया जाता है – लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट और रेंट एग्रीमेंट। भले ही ये दोनों समझौते एक जैसे लगते हैं, लेकिन कानूनी रूप से इनमें कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। अगर आप भी संपत्ति का उपयोग करने या किराए पर देने की योजना बना रहे हैं, तो इन दोनों समझौतों को समझना बेहद जरूरी है। आइए एक्सपर्ट वकील की मदद से इन दोनों में अंतर को विस्तार से समझते हैं।

1. परिभाषा में अंतर:

  • लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट: यह एक कानूनी समझौता है जिसमें संपत्ति का मालिक (लाइसेंसर) किसी दूसरे व्यक्ति (लाइसेंसी) को एक निश्चित समय के लिए संपत्ति का उपयोग करने की अनुमति देता है, बिना किसी स्थायी अधिकार के।
  • रेंट एग्रीमेंट: यह समझौता संपत्ति के मालिक और किराएदार के बीच होता है, जिसमें किराएदार को संपत्ति पर एक निश्चित अवधि के लिए अधिकार मिलता है। इसमें मालिक संपत्ति का आंशिक अधिकार किराएदार को सौंप देता है।

2. कानूनी अधिकार में अंतर:

  • लीव एंड लाइसेंस: इसमें लाइसेंसधारी को संपत्ति पर कब्जे का अधिकार नहीं मिलता, केवल उपयोग करने की अनुमति मिलती है।
  • रेंट एग्रीमेंट: इसमें किराएदार को संपत्ति पर एक प्रकार का कब्जा (पजेशन) मिल जाता है, जो उसे कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

3. समाप्ति की शर्तें:

  • लीव एंड लाइसेंस: यह समझौता आसानी से समाप्त किया जा सकता है क्योंकि इसमें स्थायी अधिकार नहीं दिए जाते।
  • रेंट एग्रीमेंट: इसे समाप्त करना कठिन होता है क्योंकि किराएदार को कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं।

4. कानूनी विवाद में अंतर:

  • लीव एंड लाइसेंस: किसी विवाद की स्थिति में मालिक के पक्ष में निर्णय होने की संभावना अधिक होती है।
  • रेंट एग्रीमेंट: यहां विवाद होने पर किराएदार को बेदखल करना जटिल और समय लेने वाला हो सकता है।

5. पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) का महत्व:

  • लीव एंड लाइसेंस: आमतौर पर 11 महीने की अवधि के लिए बनाया जाता है और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं होता, लेकिन कानूनन यह सलाह दी जाती है।
  • रेंट एग्रीमेंट: यदि समझौता 12 महीने या उससे अधिक का है तो रजिस्ट्रेशन आवश्यक होता है।

6. कर (टैक्स) और अन्य खर्च:

  • लीव एंड लाइसेंस: संपत्ति मालिक को कम कर देना होता है क्योंकि यह किराए की श्रेणी में नहीं आता।
  • रेंट एग्रीमेंट: किराए से प्राप्त आय पर टैक्स देना अनिवार्य होता है।

7. किस स्थिति में कौन सा समझौता उपयुक्त है?

  • लीव एंड लाइसेंस: अगर आपको संपत्ति थोड़े समय के लिए उपयोग करनी है और विवाद से बचना है तो यह बेहतर है।
  • रेंट एग्रीमेंट: यदि आप लंबे समय तक संपत्ति में रहना चाहते हैं और सुरक्षा चाहते हैं तो यह समझौता सही है।

निष्कर्ष:

लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट और रेंट एग्रीमेंट में अंतर को समझना आवश्यक है ताकि आप सही समझौता कर सकें। दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं जो आपकी जरूरतों पर निर्भर करते हैं। अगर आप सही समझौते का चयन करना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट वकील की सलाह अवश्य लें।

अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: ExpertVakil.in

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