लीज बनाम किराया: क्या है अंतर? | लीज एग्रीमेंट और रेंट एग्रीमेंट की पूरी जानकारी

Date:

1. परिचय

किराये पर संपत्ति लेने या देने के दौरान कई लोग ‘लीज’ और ‘रेंट’ शब्दों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में ये दोनों अलग-अलग होते हैं। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि लीज और किराए में क्या अंतर है, इनसे जुड़े कानूनी प्रावधान क्या हैं और इनसे संबंधित समझौते कैसे किए जाते हैं।


2. लीज (Lease) क्या है?

लीज एक दीर्घकालिक समझौता होता है जिसमें किसी संपत्ति को एक निश्चित समयावधि के लिए उपयोग करने का अधिकार दिया जाता है। यह आमतौर पर वाणिज्यिक संपत्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है।

लीज की विशेषताएँ:

  • लीज की अवधि लंबी होती है (आमतौर पर 12 महीनों से अधिक)।
  • किराया और अन्य शर्तें पहले से निर्धारित होती हैं।
  • संपत्ति का मालिक किसी भी कारण से लीज की अवधि पूरी होने से पहले समझौते को समाप्त नहीं कर सकता।
  • किराएदार को अधिक सुरक्षा प्राप्त होती है।

उदाहरण: अगर कोई व्यक्ति किसी ऑफिस को 5 वर्षों के लिए लीज पर लेता है, तो उसे 5 वर्षों तक उसी किराये पर संपत्ति का उपयोग करने का अधिकार रहेगा।


3. किराया (Rent) क्या है?

किराया एक अल्पकालिक समझौता होता है जिसमें संपत्ति को मासिक आधार पर किराए पर दिया जाता है। यह आमतौर पर आवासीय संपत्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है।

किराए की विशेषताएँ:

  • किराये की अवधि कम होती है (आमतौर पर 11 महीने या उससे कम)।
  • मकान मालिक या किरायेदार तय समय पर किराया बढ़ा सकता है या समझौता समाप्त कर सकता है।
  • किराएदार को कानूनी रूप से कम सुरक्षा प्राप्त होती है।
  • किराए के समझौते को मकान मालिक कभी भी नोटिस देकर समाप्त कर सकता है।

उदाहरण: अगर कोई व्यक्ति किसी फ्लैट को 11 महीने के लिए किराए पर लेता है, तो उसे हर महीने किराया देना होगा और मकान मालिक उसकी शर्तें बदल सकता है।


4. लीज एग्रीमेंट और रेंट एग्रीमेंट में अंतर

बिंदुलीज एग्रीमेंटरेंट एग्रीमेंट
अवधि12 महीने से अधिक11 महीने या उससे कम
किराया परिवर्तनलीज की अवधि तक तय रहता हैमकान मालिक बदल सकता है
समझौते की समाप्तिलीज अवधि पूरी होने पर ही संभवमकान मालिक या किरायेदार कभी भी समाप्त कर सकते हैं
कानूनी सुरक्षाअधिक सुरक्षा प्राप्तकम सुरक्षा प्राप्त
प्रचलित उपयोगवाणिज्यिक संपत्तियों मेंआवासीय संपत्तियों में

5. कानूनी पहलू: लीज एग्रीमेंट और रेंट एग्रीमेंट

  • लीज एग्रीमेंट: इसे स्टांप पेपर पर तैयार किया जाता है और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होता है।
  • रेंट एग्रीमेंट: 11 महीने से कम की अवधि के लिए इसका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं होता है।
  • भारत में रेंट कंट्रोल एक्ट (Rent Control Act) और ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट (Transfer of Property Act) के तहत किराए और लीज से जुड़े नियम निर्धारित किए जाते हैं।

6. कौन सा विकल्प बेहतर है?

अगर आपको दीर्घकालिक स्थिरता और सुरक्षा चाहिए तो लीज एग्रीमेंट बेहतर है। लेकिन अगर आप लचीलेपन के साथ कम अवधि के लिए संपत्ति किराए पर लेना चाहते हैं, तो रेंट एग्रीमेंट सही रहेगा।


7. निष्कर्ष

लीज और किराए में प्रमुख अंतर उनकी अवधि, कानूनी सुरक्षा और समझौते की शर्तों में होता है। सही विकल्प चुनने से पहले अपने उद्देश्यों, कानूनी नियमों और वित्तीय स्थितियों का मूल्यांकन करें।

अगर आपको लीज एग्रीमेंट या रेंट एग्रीमेंट तैयार करवाना है, तो ExpertVakil.in पर संपर्क करें और कानूनी सहायता प्राप्त करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_img
spot_img

Popular

More like this
Related

आधार, वोटर आईडी जन्मतिथि का पक्का सबूत नहीं हैं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

कई बार नौकरी या कानूनी दावों में जन्मतिथि साबित...

NCLT ट्रेडमार्क मालिकाना हक विवाद पर फैसला नहीं: सुप्रीम कोर्ट

धारा 60(5)(c) आईबीसी: एनसीएलटी की सीमित भूमिका कॉर्पोरेट दिवालिया कार्यवाही...

जमानत सुनवाई टालना सही नहीं: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

कई बार आरोपी को जमानत मिलने में देरी इसलिए...

पत्नी बिना कारण मायके रहना: तलाक का मजबूत ग्राउंड!

वाइफ स्टेयिंग ऐट मायका विदाउट रीजन डिवोर्स ग्राउंड इंडिया –...